हिल जाएगी दुनिया… अमेरिका-ईरान युद्ध से 3 करोड़ लोग होंगे गरीब

  नई दिल्ली

अमेरिका-ईरान के बीच 50 दिन से ज्यादा समय चले युद्ध में हालांकि फिलहाल सीजफायर चल रहा है, लेकिन ग्लोबल टेंशन बरकरार है. इस जंग का असर दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस संकट (Oil-Gas Crisis) के रूप में देखने को मिला, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया. इन सबसे बीच संयुक्त राष्ट्र के विकास प्रमुख की ओर से बड़ी चेतावनी दी गई है, जिसमें कहा गया है कि US-Iran War से पैदा हो रहे हालातों के चलते करीब 3 करोड़ लोग गरीबी में जा सकते हैं. रिपोर्ट में इसके पीछे की बड़ी वजहों का भी जिक्र किया गया है। 

साल के अंत तक दिखेगा बड़ा असर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के ग्रोथ चीफ अलेक्जेंडर डी क्रू ने मिडिल ईस्ट के खतरनाक प्रभाव की तरफ फोकस किया है और बड़ी चेतावनी जारी की है. उन्होंने कहा है कि US-Iran War के चलते होर्मुज स्ट्रेट से मालवाहक जहाजों के लगातार फंसने  के कारण सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि फर्टिलाइजर्स की सप्लाई भी प्रभावित हुई है, जो कि एग्रीकल्चर प्रोडक्शन पर सीधे असर डाल रही है. इस साल के अंत में फसलों की पैदावार पर इसका असर साफ देखने को मिलेगा। 

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क्रू ने आगे कहा कि भले ही अमेरिका और ईरान का ये युद्ध कल ही खत्म क्यों न हो जाए, लेकिन इसके पहले से ही दिख रहे प्रभाव आगे भी जारी रहेंगे, जो दुनिया के 30 मिलियन या 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को गरीबी में धकेल सकते हैं. इस संघर्ष के अप्रत्यक्ष प्रभावों से आने वाले महीनों में खाद्य असुरक्षा बढ़ने की आशंका बनी हुई है। 

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ग्लोबल फूड क्राइसिस का डर 
संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) ने भी बीते सप्ताह कुछ ऐसी ही चेतावनी जारी की थी और इसमें कहा गया था कि मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय तक चलने वाला संकट ग्लोबल फूड क्राइसिस (Global Food Crisis) का कारण बन सकता है। 

एफएओ के मुताबिक, भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, सोमालिया, सूडान, तंजानिया, केन्या और मिस्र जैसे देशों में सबसे ज्यादा जोखिम नजर आ रहा है. रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ ही महीनों में खाद्य असुरक्षा का कोहराम देखने को मिलने लगेगा और सबसे बड़ी बात ये है कि इसके बारे में ज्यादा कुछ कर भी नहीं सकते हैं। 

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GDP पर दबाव, दुनिया संकट में
संयुक्त राष्ट्र विकास (UNDP) चीफ डी क्रू का कहना है कि Iran War के असर के चलते पहले ही ग्लोबल जीडीपी का 0.5% से 0.8% तक नष्ट हो चुका है. उन्होंने कहा कि जिन चीजों को बनने में दशकों का समय लग जाता है, उन्हें नष्ट होने के लिए आठ हफ्ते चलता यूएस-ईरान युद्ध ही काफी रहा। 

बीते 28 फरवरी इस युद्ध की शुरुआत हुई थी, जबकि अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर स्ट्राइक शुरू की थी और ईरान के पलटवार के बाद दुनिया की लाइफलाइन वाले जाने वाले तेल-गैस रूट अवरुद्ध हो गई और एनर्जी समेत जरूरी सामग्रियों की सप्लाई चेन टूट सी गई। 

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